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107
وَإِن يَمسَسكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلا كاشِفَ لَهُ إِلّا هُوَ ۖ وَإِن يُرِدكَ بِخَيرٍ فَلا رادَّ لِفَضلِهِ ۚ يُصيبُ بِهِ مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ ۚ وَهُوَ الغَفورُ الرَّحيمُ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

यदि अल्लाह तुम्हें किसी तकलीफ़ में डाल दे तो उसके सिवा कोई उसे दूर करनेवाला नहीं। और यदि वह तुम्हारे लिए किसी भलाई का इरादा कर ले तो कोई उसके अनुग्रह को फेरनेवाला भी नहीं। वह इसे अपने बन्दों में से जिस तक चाहता है, पहुँचाता है और वह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है।"