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22
هُوَ الَّذي يُسَيِّرُكُم فِي البَرِّ وَالبَحرِ ۖ حَتّىٰ إِذا كُنتُم فِي الفُلكِ وَجَرَينَ بِهِم بِريحٍ طَيِّبَةٍ وَفَرِحوا بِها جاءَتها ريحٌ عاصِفٌ وَجاءَهُمُ المَوجُ مِن كُلِّ مَكانٍ وَظَنّوا أَنَّهُم أُحيطَ بِهِم ۙ دَعَوُا اللَّهَ مُخلِصينَ لَهُ الدّينَ لَئِن أَنجَيتَنا مِن هٰذِهِ لَنَكونَنَّ مِنَ الشّاكِرينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

वही है जो तुम्हें थल और जल में चलाता है, यहाँ तक कि जब तुम नौका में होते हो और वह लोगो को लिए हुए अच्छी अनुकूल वायु के सहारे चलती है और वे उससे हर्षित होते है कि अकस्मात उनपर प्रचंड वायु का झोंका आता है, हर ओर से लहरें उनपर चली आती है और वे समझ लेते है कि बस अब वे घिर गए, उस समय वे अल्लाह ही को, निरी उसी पर आस्था रखकर पुकारने लगते है, "यदि तूने हमें इससे बचा लिया तो हम अवश्य आभारी होंगे।"