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29
وَيا قَومِ لا أَسأَلُكُم عَلَيهِ مالًا ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلَى اللَّهِ ۚ وَما أَنا بِطارِدِ الَّذينَ آمَنوا ۚ إِنَّهُم مُلاقو رَبِّهِم وَلٰكِنّي أَراكُم قَومًا تَجهَلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और तुम हो कि उसको नापसन्द किए जाते हो और ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुमसे इसके सिले में कुछ माल का तालिब नहीं मेरी मज़दूरी तो सिर्फ ख़ुदा के ज़िम्मे है और मै तो तुम्हारे कहने से उन लोगों को जो ईमान ला चुके हैं निकाल नहीं सकता (क्योंकि) ये लोग भी ज़रुर अपने परवरदिगार के हुज़ूर में हाज़िर होगें मगर मै तो देखता हूँ कि कुछ तुम ही लोग (नाहक़) जिहालत करते हो