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31
وَلا أَقولُ لَكُم عِندي خَزائِنُ اللَّهِ وَلا أَعلَمُ الغَيبَ وَلا أَقولُ إِنّي مَلَكٌ وَلا أَقولُ لِلَّذينَ تَزدَري أَعيُنُكُم لَن يُؤتِيَهُمُ اللَّهُ خَيرًا ۖ اللَّهُ أَعلَمُ بِما في أَنفُسِهِم ۖ إِنّي إِذًا لَمِنَ الظّالِمينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और मै तो तुमसे ये नहीं कहता कि मेरे पास खुदाई ख़ज़ाने हैं और न (ये कहता हूँ कि) मै ग़ैब वॉ हूँ (गैब का जानने वाला) और ये कहता हूँ कि मै फरिश्ता हूँ और जो लोग तुम्हारी नज़रों में ज़लील हैं उन्हें मै ये नहीं कहता कि ख़ुदा उनके साथ हरगिज़ भलाई नहीं करेगा उन लोगों के दिलों की बात ख़ुदा ही खूब जानता है और अगर मै ऐसा कहूँ तो मै भी यक़ीनन ज़ालिम हूँ