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40
حَتّىٰ إِذا جاءَ أَمرُنا وَفارَ التَّنّورُ قُلنَا احمِل فيها مِن كُلٍّ زَوجَينِ اثنَينِ وَأَهلَكَ إِلّا مَن سَبَقَ عَلَيهِ القَولُ وَمَن آمَنَ ۚ وَما آمَنَ مَعَهُ إِلّا قَليلٌ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

यहाँ तक कि जब हमारा हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा और तन्नूर से जोश मारने लगा तो हमने हुक्म दिया (ऐ नूह) हर किस्म के जानदारों में से (नर मादा का) जोड़ा (यानि) दो दो ले लो और जिस (की) हलाकत (तबाही) का हुक्म पहले ही हो चुका हो उसके सिवा अपने सब घर वाले और जो लोग ईमान ला चुके उन सबको कश्ती (नाँव) में बैठा लो और उनके साथ ईमान भी थोड़े ही लोग लाए थे