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61
۞ وَإِلىٰ ثَمودَ أَخاهُم صالِحًا ۚ قالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ ۖ هُوَ أَنشَأَكُم مِنَ الأَرضِ وَاستَعمَرَكُم فيها فَاستَغفِروهُ ثُمَّ توبوا إِلَيهِ ۚ إِنَّ رَبّي قَريبٌ مُجيبٌ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और (हमने) क़ौमे समूद के पास उनके भाई सालेह को (पैग़म्बर बनाकर भेजा) तो उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं उसी ने तुमको ज़मीन (की मिट्टी) से पैदा किया और तुमको उसमें बसाया तो उससे मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में तौबा करो (बेशक मेरा परवरदिगार (हर शख़्श के) क़रीब और सबकी सुनता और दुआ क़ुबूल करता है