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25
وَاستَبَقَا البابَ وَقَدَّت قَميصَهُ مِن دُبُرٍ وَأَلفَيا سَيِّدَها لَدَى البابِ ۚ قالَت ما جَزاءُ مَن أَرادَ بِأَهلِكَ سوءًا إِلّا أَن يُسجَنَ أَو عَذابٌ أَليمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

वे दोनों दरवाज़े की ओर झपटे और उस स्त्री ने उसका कुर्ता पीछे से फाड़ डाला। दरवाज़े पर दोनों ने उस स्त्री के पति को उपस्थित पाया। वह बोली, "जो कोई तुम्हारी घरवाली के साथ बुरा इरादा करे, उसका बदला इसके सिवा और क्या होगा कि उसे बन्दी बनाया जाए या फिर कोई दुखद यातना दी जाए?"