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22
وَقالَ الشَّيطانُ لَمّا قُضِيَ الأَمرُ إِنَّ اللَّهَ وَعَدَكُم وَعدَ الحَقِّ وَوَعَدتُكُم فَأَخلَفتُكُم ۖ وَما كانَ لِيَ عَلَيكُم مِن سُلطانٍ إِلّا أَن دَعَوتُكُم فَاستَجَبتُم لي ۖ فَلا تَلوموني وَلوموا أَنفُسَكُم ۖ ما أَنا بِمُصرِخِكُم وَما أَنتُم بِمُصرِخِيَّ ۖ إِنّي كَفَرتُ بِما أَشرَكتُمونِ مِن قَبلُ ۗ إِنَّ الظّالِمينَ لَهُم عَذابٌ أَليمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जब मामले का फ़ैसला हो चुकेगा तब शैतान कहेगा, "अल्लाह ने तो तुमसे सच्चा वादा किया था और मैंने भी तुमसे वादा किया था, फिर मैंने तो तुमसे सत्य के प्रतिकूल कहा था। और मेरा तो तुमपर कोई अधिकार नहीं था, सिवाय इसके कि मैंने मान ली; बल्कि अपने आप ही को मलामत करो, न मैं तुम्हारी फ़रियाद सुन सकता हूँ और न तुम मेरी फ़रियाद सुन सकते हो। पहले जो तुमने सहभागी ठहराया था, मैं उससे विरक्त हूँ।" निश्चय ही अत्याचारियों के लिए दुखदायिनी यातना है