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37
رَبَّنا إِنّي أَسكَنتُ مِن ذُرِّيَّتي بِوادٍ غَيرِ ذي زَرعٍ عِندَ بَيتِكَ المُحَرَّمِ رَبَّنا لِيُقيمُوا الصَّلاةَ فَاجعَل أَفئِدَةً مِنَ النّاسِ تَهوي إِلَيهِم وَارزُقهُم مِنَ الثَّمَراتِ لَعَلَّهُم يَشكُرونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

ऐ हमारे पालने वाले मैने तेरे मुअज़िज़ (इज्ज़त वाले) घर (काबे) के पास एक बेखेती के (वीरान) बियाबान (मक्का) में अपनी कुछ औलाद को (लाकर) बसाया है ताकि ऐ हमारे पालने वाले ये लोग बराबर यहाँ नमाज़ पढ़ा करें तो तू कुछ लोगों के दिलों को उनकी तरफ माएल कर (ताकि वह यहाँ आकर आबाद हों) और उन्हें तरह तरह के फलों से रोज़ी अता कर ताकि ये लोग (तेरा) शुक्र करें