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4
وَما أَهلَكنا مِن قَريَةٍ إِلّا وَلَها كِتابٌ مَعلومٌ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

अनक़रीब ही (इसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा और हमने कभी कोई बस्ती तबाह नहीं की मगर ये कि उसकी तबाही के लिए (पहले ही से) समझी बूझी मियाद मुक़र्रर लिखी हुई थी