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28
الَّذينَ تَتَوَفّاهُمُ المَلائِكَةُ ظالِمي أَنفُسِهِم ۖ فَأَلقَوُا السَّلَمَ ما كُنّا نَعمَلُ مِن سوءٍ ۚ بَلىٰ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ بِما كُنتُم تَعمَلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

वह लोग हैं कि जब फरिश्ते उनकी रुह क़ब्ज़ करने लगते हैं (और) ये लोग (कुफ्र करके) आप अपने ऊपर सितम ढ़ाते रहे तो इताअत पर आमादा नज़र आते हैं और (कहते हैं कि) हम तो (अपने ख्याल में) कोई बुराई नहीं करते थे (तो फरिश्ते कहते हैं) हाँ जो कुछ तुम्हारी करतूते थी ख़ुदा उससे खूब अच्छी तरह वाक़िफ हैं