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158
۞ إِنَّ الصَّفا وَالمَروَةَ مِن شَعائِرِ اللَّهِ ۖ فَمَن حَجَّ البَيتَ أَوِ اعتَمَرَ فَلا جُناحَ عَلَيهِ أَن يَطَّوَّفَ بِهِما ۚ وَمَن تَطَوَّعَ خَيرًا فَإِنَّ اللَّهَ شاكِرٌ عَليمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

निस्संदेह सफ़ा और मरवा अल्लाह की विशेष निशानियों में से हैं; अतः जो इस घर (काबा) का हज या उमपा करे, उसके लिए इसमें कोई दोष नहीं कि वह इन दोनों (पहाडियों) के बीच फेरा लगाए। और जो कोई स्वेच्छा और रुचि से कोई भलाई का कार्य करे तो अल्लाह भी गुणग्राहक, सर्वज्ञ है