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15
إِنَّ السّاعَةَ آتِيَةٌ أَكادُ أُخفيها لِتُجزىٰ كُلُّ نَفسٍ بِما تَسعىٰ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(क्योंकि) क़यामत ज़रूर आने वाली है और मैं उसे लामहौला छिपाए रखूँगा ताकि हर शख्स (उसके ख़ौफ से नेकी करे) और वैसी कोशिश की है उसका उसे बदला दिया जाए