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60
وَالقَواعِدُ مِنَ النِّساءِ اللّاتي لا يَرجونَ نِكاحًا فَلَيسَ عَلَيهِنَّ جُناحٌ أَن يَضَعنَ ثِيابَهُنَّ غَيرَ مُتَبَرِّجاتٍ بِزينَةٍ ۖ وَأَن يَستَعفِفنَ خَيرٌ لَهُنَّ ۗ وَاللَّهُ سَميعٌ عَليمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और बूढ़ी बूढ़ी औरतें जो (बुढ़ापे की वजह से) निकाह की ख्वाहिश नही रखती वह अगर अपने कपड़े (दुपट्टे वगैराह) उतारकर (सर नंगा) कर डालें तो उसमें उन पर कुछ गुनाह नही है- बशर्ते कि उनको अपना बनाव सिंगार दिखाना मंज़ूर न हो और (इस से भी) बचें तो उनके लिए और बेहतर है और ख़ुदा तो (सबकी सब कुछ) सुनता और जानता है