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31
أَلّا تَعلوا عَلَيَّ وَأتوني مُسلِمينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

यह कि मेरे मुक़ाबले में सरकशी न करो और आज्ञाकारी बनकर मेरे पास आओ।"