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48
وَكانَ فِي المَدينَةِ تِسعَةُ رَهطٍ يُفسِدونَ فِي الأَرضِ وَلا يُصلِحونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और शहर में नौ आदमी थे जो मुल्क के बानीये फसाद थे और इसलाह की फिक्र न करते थे-उन लोगों ने (आपस में) कहा कि बाहम ख़ुदा की क़सम खाते जाओ