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55
أَئِنَّكُم لَتَأتونَ الرِّجالَ شَهوَةً مِن دونِ النِّساءِ ۚ بَل أَنتُم قَومٌ تَجهَلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

क्या तुम औरतों को छोड़कर शहवत से मर्दों के आते हो (ये तुम अच्छा नहीं करते) बल्कि तुम लोग बड़ी जाहिल क़ौम हो तो लूत की क़ौम का इसके सिवा कुछ जवाब न था