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82
وَأَصبَحَ الَّذينَ تَمَنَّوا مَكانَهُ بِالأَمسِ يَقولونَ وَيكَأَنَّ اللَّهَ يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ وَيَقدِرُ ۖ لَولا أَن مَنَّ اللَّهُ عَلَينا لَخَسَفَ بِنا ۖ وَيكَأَنَّهُ لا يُفلِحُ الكافِرونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अब वही लोग, जो कल उसके पद की कामना कर रहे थे, कहने लगें, "अफ़सोस हम भूल गए थे कि अल्लाह अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा करता है और जिसे चाहता है नपी-तुली देता है। यदि अल्लाह ने हमपर उपकार न किया होता तो हमें भी धँसा देता। अफ़सोस हम भूल गए थे कि इनकार करनेवाले सफल नहीं हुआ करते।"