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112
ضُرِبَت عَلَيهِمُ الذِّلَّةُ أَينَ ما ثُقِفوا إِلّا بِحَبلٍ مِنَ اللَّهِ وَحَبلٍ مِنَ النّاسِ وَباءوا بِغَضَبٍ مِنَ اللَّهِ وَضُرِبَت عَلَيهِمُ المَسكَنَةُ ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم كانوا يَكفُرونَ بِآياتِ اللَّهِ وَيَقتُلونَ الأَنبِياءَ بِغَيرِ حَقٍّ ۚ ذٰلِكَ بِما عَصَوا وَكانوا يَعتَدونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

वे जहाँ कहीं भी पाए गए उनपर ज़िल्लत (अपमान) थोप दी गई। किन्तु अल्लाह की रस्सी थामें या लोगों का रस्सी, तो और बात है। वे ल्लाह के प्रकोप के पात्र हुए और उनपर दशाहीनता थोप दी गई। यह इसलिए कि वे अल्लाह की आयतों का इनकार और नबियों को नाहक़ क़त्ल करते रहे है। और यह इसलिए कि उन्होंने अवज्ञा की और सीमोल्लंघन करते रहे