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20
فَإِن حاجّوكَ فَقُل أَسلَمتُ وَجهِيَ لِلَّهِ وَمَنِ اتَّبَعَنِ ۗ وَقُل لِلَّذينَ أوتُوا الكِتابَ وَالأُمِّيّينَ أَأَسلَمتُم ۚ فَإِن أَسلَموا فَقَدِ اهتَدَوا ۖ وَإِن تَوَلَّوا فَإِنَّما عَلَيكَ البَلاغُ ۗ وَاللَّهُ بَصيرٌ بِالعِبادِ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अब यदि वे तुमसे झगड़े तो कह दो, "मैंने और मेरे अनुयायियों ने तो अपने आपको अल्लाह के हवाले कर दिया हैं।" और जिन्हें किताब मिली थी और जिनके पास किताब नहीं है, उनसे कहो, "क्या तुम भी इस्लाम को अपनाते हो?" यदि वे इस्लाम को अंगीकार कर लें तो सीधा मार्ग पर गए। और यदि मुँह मोड़े तो तुमपर केवल (संदेश) पहुँचा देने की ज़िम्मेदारी है। और अल्लाह स्वयं बन्दों को देख रहा है