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14
وَوَصَّينَا الإِنسانَ بِوالِدَيهِ حَمَلَتهُ أُمُّهُ وَهنًا عَلىٰ وَهنٍ وَفِصالُهُ في عامَينِ أَنِ اشكُر لي وَلِوالِدَيكَ إِلَيَّ المَصيرُ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(जिस की बख़्शिस नहीं) और हमने इन्सान को जिसे उसकी माँ ने दुख पर दुख सह के पेट में रखा (इसके अलावा) दो बरस में (जाके) उसकी दूध बढ़ाई की (अपने और) उसके माँ बाप के बारे में ताक़ीद की कि मेरा भी शुक्रिया अदा करो और अपने वालदैन का (भी) और आख़िर सबको मेरी तरफ लौट कर जाना है