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12
بَل عَجِبتَ وَيَسخَرونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं