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28
أَم نَجعَلُ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ كَالمُفسِدينَ فِي الأَرضِ أَم نَجعَلُ المُتَّقينَ كَالفُجّارِ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

(क्या हम उनको जो समझते है कि जगत की संरचना व्यर्थ नहीं है, उनके समान कर देंगे जो जगत को निरर्थक मानते है।) या हम उन लोगों को जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, उनके समान कर देंगे जो धरती में बिगाड़ पैदा करते है; या डर रखनेवालों को हम दुराचारियों जैसा कर देंगे?