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131
وَلِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۗ وَلَقَد وَصَّينَا الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ مِن قَبلِكُم وَإِيّاكُم أَنِ اتَّقُوا اللَّهَ ۚ وَإِن تَكفُروا فَإِنَّ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۚ وَكانَ اللَّهُ غَنِيًّا حَميدًا

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

आकाशों और धरती में जो कुछ है, सब अल्लाह ही का है। तुमसे पहले जिन्हें किताब दी गई थी, उन्हें और तुम्हें भी हमने ताकीद की है कि "अल्लाह का डर रखो।" यदि तुम इनकार करते हो, तो इससे क्या होने का? आकाशों और धरती में जो कुछ है, सब अल्लाह ही का रहेगा। अल्लाह तो निस्पृह, प्रशंसनीय है