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22
تَرَى الظّالِمينَ مُشفِقينَ مِمّا كَسَبوا وَهُوَ واقِعٌ بِهِم ۗ وَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ في رَوضاتِ الجَنّاتِ ۖ لَهُم ما يَشاءونَ عِندَ رَبِّهِم ۚ ذٰلِكَ هُوَ الفَضلُ الكَبيرُ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(क़यामत के दिन) देखोगे कि ज़ालिम लोग अपने आमाल (के वबाल) से डर रहे होंगे और वह उन पर पड़ कर रहेगा और जिन्होने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे काम किए वह बेहिश्त के बाग़ों में होंगे वह जो कुछ चाहेंगे उनके लिए उनके परवरदिगार की बारगाह में (मौजूद) है यही तो (ख़ुदा का) बड़ा फज़ल है