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52
وَكَذٰلِكَ أَوحَينا إِلَيكَ روحًا مِن أَمرِنا ۚ ما كُنتَ تَدري مَا الكِتابُ وَلَا الإيمانُ وَلٰكِن جَعَلناهُ نورًا نَهدي بِهِ مَن نَشاءُ مِن عِبادِنا ۚ وَإِنَّكَ لَتَهدي إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और इसी प्रकार हमने अपने आदेश से एक रूह (क़ुरआन) की प्रकाशना तुम्हारी ओर की है। तुम नहीं जानते थे कि किताब क्या होती है और न ईमान को (जानते थे), किन्तु हमने इस (प्रकाशना) को एक प्रकाश बनाया, जिसके द्वारा हम अपने बन्दों में से जिसे चाहते है मार्ग दिखाते है। निश्चय ही तुम एक सीधे मार्ग की ओर पथप्रदर्शन कर रहे हो-