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35
فَاصبِر كَما صَبَرَ أُولُو العَزمِ مِنَ الرُّسُلِ وَلا تَستَعجِل لَهُم ۚ كَأَنَّهُم يَومَ يَرَونَ ما يوعَدونَ لَم يَلبَثوا إِلّا ساعَةً مِن نَهارٍ ۚ بَلاغٌ ۚ فَهَل يُهلَكُ إِلَّا القَومُ الفاسِقونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अतः धैर्य से काम लो, जिस प्रकार संकल्पवान रसूलों ने धैर्य से काम लिया। और उनके लिए जल्दी न करो। जिस दिन वे लोग उस चीज़ को देख लेंगे जिसका उनसे वादा किया जाता है, तो वे महसूस करेंगे कि जैसे वे बस दिन की एक घड़ी भर ही ठहरे थे। यह (संदेश) साफ़-साफ़ पहुँचा देना है। अब क्या अवज्ञाकारी लोगों के अतिरिक्त कोई और विनष्ट होगा?