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15
مَثَلُ الجَنَّةِ الَّتي وُعِدَ المُتَّقونَ ۖ فيها أَنهارٌ مِن ماءٍ غَيرِ آسِنٍ وَأَنهارٌ مِن لَبَنٍ لَم يَتَغَيَّر طَعمُهُ وَأَنهارٌ مِن خَمرٍ لَذَّةٍ لِلشّارِبينَ وَأَنهارٌ مِن عَسَلٍ مُصَفًّى ۖ وَلَهُم فيها مِن كُلِّ الثَّمَراتِ وَمَغفِرَةٌ مِن رَبِّهِم ۖ كَمَن هُوَ خالِدٌ فِي النّارِ وَسُقوا ماءً حَميمًا فَقَطَّعَ أَمعاءَهُم

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उस जन्नत की शान, जिसका वादा डर रखनेवालों से किया गया है, यह है कि ऐसे पानी की नहरें होगी जो प्रदूषित नहीं होता। और ऐसे दूध की नहरें होंगी जिसके स्वाद में तनिक भी अन्तर न आया होगा, और ऐसे पेय की नहरें होंगी जो पीनेवालों के लिए मज़ा ही मज़ा होंगी, और साफ़-सुधरे शहद की नहरें भी होंगी। और उनके लिए वहाँ हर प्रकार के फल होंगे और क्षमा उनके अपने रब की ओर से - क्या वे उन जैसे हो सकते है, जो सदैव आग में रहनेवाले है और जिन्हें खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा, जो उनकी आँतों को टुकड़े-टुकड़े करके रख देगा?