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104
وَإِذا قيلَ لَهُم تَعالَوا إِلىٰ ما أَنزَلَ اللَّهُ وَإِلَى الرَّسولِ قالوا حَسبُنا ما وَجَدنا عَلَيهِ آباءَنا ۚ أَوَلَو كانَ آباؤُهُم لا يَعلَمونَ شَيئًا وَلا يَهتَدونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और जब उनसे कहा जाता है कि जो (क़ुरान) ख़ुदा ने नाज़िल फरमाया है उसकी तरफ और रसूल की आओ (और जो कुछ कहे उसे मानों तो कहते हैं कि हमने जिस (रंग) में अपने बाप दादा को पाया वही हमारे लिए काफी है क्या (ये लोग लकीर के फकीर ही रहेंगे) अगरचे उनके बाप दादा न कुछ जानते ही हों न हिदायत ही पायी हो