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31
فَبَعَثَ اللَّهُ غُرابًا يَبحَثُ فِي الأَرضِ لِيُرِيَهُ كَيفَ يُواري سَوءَةَ أَخيهِ ۚ قالَ يا وَيلَتا أَعَجَزتُ أَن أَكونَ مِثلَ هٰذَا الغُرابِ فَأُوارِيَ سَوءَةَ أَخي ۖ فَأَصبَحَ مِنَ النّادِمينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(तब उसे फ़िक्र हुई कि लाश को क्या करे) तो ख़ुदा ने एक कौवे को भेजा कि वह ज़मीन को कुरेदने लगा ताकि उसे (क़ाबील) को दिखा दे कि उसे अपने भाई की लाश क्योंकर छुपानी चाहिए (ये देखकर) वह कहने लगा हाए अफ़सोस क्या मैं उस से भी आजिज़ हूं कि उस कौवे की बराबरी कर सकॅू कि (बला से यह भी होता) तो अपने भाई की लाश छुपा देता अलगरज़ वह (अपनी हरकत से) बहुत पछताया