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93
لَيسَ عَلَى الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ جُناحٌ فيما طَعِموا إِذا مَا اتَّقَوا وَآمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ ثُمَّ اتَّقَوا وَآمَنوا ثُمَّ اتَّقَوا وَأَحسَنوا ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ المُحسِنينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(फिर करो चाहे न करो तुम मुख़तार हो) जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उन पर जो कुछ खा (पी) चुके उसमें कुछ गुनाह नहीं जब उन्होंने परहेज़गारी की और ईमान ले आए और अच्छे (अच्छे) काम किए फिर परहेज़गारी की और नेकियाँ कीं और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है