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14
لا يُقاتِلونَكُم جَميعًا إِلّا في قُرًى مُحَصَّنَةٍ أَو مِن وَراءِ جُدُرٍ ۚ بَأسُهُم بَينَهُم شَديدٌ ۚ تَحسَبُهُم جَميعًا وَقُلوبُهُم شَتّىٰ ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم قَومٌ لا يَعقِلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

ये सब के सब मिलकर भी तुमसे नहीं लड़ सकते, मगर हर तरफ से महफूज़ बस्तियों में या (शहर पनाह की) दीवारों की आड़ में इनकी आपस में तो बड़ी धाक है कि तुम ख्याल करोगे कि सब के सब (एक जान) हैं मगर उनके दिल एक दूसरे से फटे हुए हैं ये इस वजह से कि ये लोग बेअक्ल हैं