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12
قُل لِمَن ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ قُل لِلَّهِ ۚ كَتَبَ عَلىٰ نَفسِهِ الرَّحمَةَ ۚ لَيَجمَعَنَّكُم إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ لا رَيبَ فيهِ ۚ الَّذينَ خَسِروا أَنفُسَهُم فَهُم لا يُؤمِنونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

कहो, "आकाशों और धरती में जो कुछ है किसका है?" कह दो, "अल्लाह ही का है।" उसने दयालुता को अपने ऊपर अनिवार्य कर दिया है। निश्चय ही वह तुम्हें क़ियामत के दिन इकट्ठा करेगा, इसमें कोई सन्देह नहीं है। जिन लोगों ने अपने-आपको घाटे में डाला है, वही है जो ईमान नहीं लाते