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141
۞ وَهُوَ الَّذي أَنشَأَ جَنّاتٍ مَعروشاتٍ وَغَيرَ مَعروشاتٍ وَالنَّخلَ وَالزَّرعَ مُختَلِفًا أُكُلُهُ وَالزَّيتونَ وَالرُّمّانَ مُتَشابِهًا وَغَيرَ مُتَشابِهٍ ۚ كُلوا مِن ثَمَرِهِ إِذا أَثمَرَ وَآتوا حَقَّهُ يَومَ حَصادِهِ ۖ وَلا تُسرِفوا ۚ إِنَّهُ لا يُحِبُّ المُسرِفينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और वही है जिसने बाग़ पैदा किए; कुछ जालियों पर चढ़ाए जाते है और कुछ नहीं चढ़ाए जाते और खजूर और खेती भी जिनकी पैदावार विभिन्न प्रकार की होती है, और ज़ैतून और अनार जो एक-दूसरे से मिलते-जुलते भी है और नहीं भी मिलते है। जब वह फल दे, तो उसका फल खाओ और उसका हक़ अदा करो जो उस (फ़सल) की कटाई के दिन वाजिब होता है। और हद से आगे न बढ़ो, क्योंकि वह हद से आगे बढ़नेवालों को पसन्द नहीं करता