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26
وَهُم يَنهَونَ عَنهُ وَيَنأَونَ عَنهُ ۖ وَإِن يُهلِكونَ إِلّا أَنفُسَهُم وَما يَشعُرونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और ये लोग (दूसरों को भी) उस के (सुनने से) से रोकते हैं और ख़ुद तो अलग थलग रहते ही हैं और (इन बातों से) बस आप ही अपने को हलाक करते हैं और (अफसोस) समझते नहीं