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59
۞ وَعِندَهُ مَفاتِحُ الغَيبِ لا يَعلَمُها إِلّا هُوَ ۚ وَيَعلَمُ ما فِي البَرِّ وَالبَحرِ ۚ وَما تَسقُطُ مِن وَرَقَةٍ إِلّا يَعلَمُها وَلا حَبَّةٍ في ظُلُماتِ الأَرضِ وَلا رَطبٍ وَلا يابِسٍ إِلّا في كِتابٍ مُبينٍ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उसी के पास परोक्ष की कुंजियाँ है, जिन्हें उसके सिवा कोई नहीं जानता। जल और थल में जो कुछ है, उसे वह जानता है। और जो पत्ता भी गिरता है, उसे वह निश्चय ही जानता है। और धरती के अँधेरों में कोई दाना हो और कोई भी आर्द्र (गीली) और शुष्क (सूखी) चीज़ हो, निश्चय ही एक स्पष्ट किताब में मौजूद है