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93
وَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَو قالَ أوحِيَ إِلَيَّ وَلَم يوحَ إِلَيهِ شَيءٌ وَمَن قالَ سَأُنزِلُ مِثلَ ما أَنزَلَ اللَّهُ ۗ وَلَو تَرىٰ إِذِ الظّالِمونَ في غَمَراتِ المَوتِ وَالمَلائِكَةُ باسِطو أَيديهِم أَخرِجوا أَنفُسَكُمُ ۖ اليَومَ تُجزَونَ عَذابَ الهونِ بِما كُنتُم تَقولونَ عَلَى اللَّهِ غَيرَ الحَقِّ وَكُنتُم عَن آياتِهِ تَستَكبِرونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर मिथ्यारोपण करे या यह कहे कि "मेरी ओर प्रकाशना (वह्य,) की गई है," हालाँकि उसकी ओर भी प्रकाशना न की गई हो। और वह व्यक्ति से (बढ़कर अत्याचारी कौन होगा) जो यह कहे कि "मैं भी ऐसी चीज़ उतार दूँगा, जैसी अल्लाह ने उतारी है।" और यदि तुम देख सकते, तुम अत्याचारी मृत्यु-यातनाओं में होते है और फ़रिश्ते अपने हाथ बढ़ा रहे होते है कि "निकालो अपने प्राण! आज तुम्हें अपमानजनक यातना दी जाएगी, क्योंकि तुम अल्लाह के प्रति झूठ बका करते थे और उसकी आयतों के मुक़ाबले में अकड़ते थे।"