You are here: Home » Chapter 60 » Verse 12 » Translation
← Sura 60 →
← Aya 12 →
12
يا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِذا جاءَكَ المُؤمِناتُ يُبايِعنَكَ عَلىٰ أَن لا يُشرِكنَ بِاللَّهِ شَيئًا وَلا يَسرِقنَ وَلا يَزنينَ وَلا يَقتُلنَ أَولادَهُنَّ وَلا يَأتينَ بِبُهتانٍ يَفتَرينَهُ بَينَ أَيديهِنَّ وَأَرجُلِهِنَّ وَلا يَعصينَكَ في مَعروفٍ ۙ فَبايِعهُنَّ وَاستَغفِر لَهُنَّ اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

ऐ नबी! जब तुम्हारे पास ईमानवाली स्त्रियाँ आकर तुमसे इसपर 'बैअत' करे कि वे अल्लाह के साथ किसी चीज़ को साझी नहीं ठहराएँगी और न चोरी करेंगी और न व्यभिचार करेंगी, और न अपनी औलाद की हत्या करेंगी और न अपने हाथों और पैरों को बीच कोई आरोप घड़कर लाएँगी. और न किसी भले काम में तुम्हारी अवज्ञा करेंगी, तो उनसे 'बैअत' ले लो और उनके लिए अल्लाह से क्षमा की प्रार्थना करो। निश्चय ही अत्यन्त बहुत क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है