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146
سَأَصرِفُ عَن آياتِيَ الَّذينَ يَتَكَبَّرونَ فِي الأَرضِ بِغَيرِ الحَقِّ وَإِن يَرَوا كُلَّ آيَةٍ لا يُؤمِنوا بِها وَإِن يَرَوا سَبيلَ الرُّشدِ لا يَتَّخِذوهُ سَبيلًا وَإِن يَرَوا سَبيلَ الغَيِّ يَتَّخِذوهُ سَبيلًا ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم كَذَّبوا بِآياتِنا وَكانوا عَنها غافِلينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

जो लोग (ख़ुदा की) ज़मीन पर नाहक़ अकड़ते फिरते हैं उनको अपनी आयतों से बहुत जल्द फेर दूंगा और मै क्या फेरूंगा ख़ुदा (उसका दिल ऐसा सख्त है कि) अगर दुनिया जहॉन के सारे मौजिज़े भी देखते तो भी ये उन पर ईमान न लाएगें और (अगर) सीधा रास्ता भी देख पाएं तो भी अपनी राह न जाएगें और अगर गुमराही की राह देख लेगें तो झटपट उसको अपना तरीक़ा बना लेगें ये कजरवी इस सबब से हुई कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया और उनसे ग़फलत करते रहे