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179
وَلَقَد ذَرَأنا لِجَهَنَّمَ كَثيرًا مِنَ الجِنِّ وَالإِنسِ ۖ لَهُم قُلوبٌ لا يَفقَهونَ بِها وَلَهُم أَعيُنٌ لا يُبصِرونَ بِها وَلَهُم آذانٌ لا يَسمَعونَ بِها ۚ أُولٰئِكَ كَالأَنعامِ بَل هُم أَضَلُّ ۚ أُولٰئِكَ هُمُ الغافِلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और गोया हमने (ख़ुदा) बहुतेरे जिन्नात और आदमियों को जहन्नुम के वास्ते पैदा किया और उनके दिल तो हैं (मगर कसदन) उन से देखते ही नहीं और उनके कान भी है (मगर) उनसे सुनने का काम ही नहीं लेते (खुलासा) ये लोग गोया जानवर हैं बल्कि उनसे भी कहीं गए गुज़रे हुए यही लोग (अमूर हक़) से बिल्कुल बेख़बर हैं