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89
قَدِ افتَرَينا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا إِن عُدنا في مِلَّتِكُم بَعدَ إِذ نَجّانَا اللَّهُ مِنها ۚ وَما يَكونُ لَنا أَن نَعودَ فيها إِلّا أَن يَشاءَ اللَّهُ رَبُّنا ۚ وَسِعَ رَبُّنا كُلَّ شَيءٍ عِلمًا ۚ عَلَى اللَّهِ تَوَكَّلنا ۚ رَبَّنَا افتَح بَينَنا وَبَينَ قَومِنا بِالحَقِّ وَأَنتَ خَيرُ الفاتِحينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"हम अल्लाह पर झूठ घड़नेवाले ठहरेंगे, यदि तुम्हारे पन्थ में लौट आएँ, इसके बाद कि अल्लाह ने हमें उससे छुटकारा दे दिया है। यह हमसे तो होने का नहीं कि हम उसमें पलट कर जाएँ, बल्कि हमारे रब अल्लाह की इच्छा ही क्रियान्वित है। ज्ञान की स्पष्ट से हमारा रब हर चीज़ को अपने घेरे में लिए हुए है। हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया है। हमारे रब, हमारे और हमारी क़ौम के बीच निश्चित अटल फ़ैसला कर दे। और तू सबसे अच्छा फ़ैसला करनेवाला है।"