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48
وَإِذ زَيَّنَ لَهُمُ الشَّيطانُ أَعمالَهُم وَقالَ لا غالِبَ لَكُمُ اليَومَ مِنَ النّاسِ وَإِنّي جارٌ لَكُم ۖ فَلَمّا تَراءَتِ الفِئَتانِ نَكَصَ عَلىٰ عَقِبَيهِ وَقالَ إِنّي بَريءٌ مِنكُم إِنّي أَرىٰ ما لا تَرَونَ إِنّي أَخافُ اللَّهَ ۚ وَاللَّهُ شَديدُ العِقابِ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और याद करो जब शैतान ने उनके कर्म उनके लिए सुन्दर बना दिए और कहा, "आज लोगों में से कोई भी तुमपर प्रभावी नहीं हो सकता। मैं तुम्हारे साथ हूँ।" किन्तु जब दोनों गिरोह आमने-सामने हुए तो वह उलटे पाँव फिर गया और कहने लगा, "मेरा तुमसे कोई सम्बन्ध नहीं। मैं वह कुछ देख रहा हूँ, जो तुम्हें नहीं दिखाई देता। मैं अल्लाह से डरता हूँ, और अल्लाह कठोर यातना देनेवाला है।"