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100
وَالسّابِقونَ الأَوَّلونَ مِنَ المُهاجِرينَ وَالأَنصارِ وَالَّذينَ اتَّبَعوهُم بِإِحسانٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنهُم وَرَضوا عَنهُ وَأَعَدَّ لَهُم جَنّاتٍ تَجري تَحتَهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها أَبَدًا ۚ ذٰلِكَ الفَوزُ العَظيمُ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और मुहाजिरीन व अन्सार में से (ईमान की तरफ) सबक़त (पहल) करने वाले और वह लोग जिन्होंने नेक नीयती से (कुबूले ईमान में उनका साथ दिया ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से ख़ुश और उनके वास्ते ख़ुदा ने (वह हरे भरे) बाग़ जिन के नीचे नहरें जारी हैं तैयार कर रखे हैं वह हमेशा अब्दआलाबाद (हमेशा) तक उनमें रहेगें यही तो बड़ी कामयाबी हैं