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108
لا تَقُم فيهِ أَبَدًا ۚ لَمَسجِدٌ أُسِّسَ عَلَى التَّقوىٰ مِن أَوَّلِ يَومٍ أَحَقُّ أَن تَقومَ فيهِ ۚ فيهِ رِجالٌ يُحِبّونَ أَن يَتَطَهَّروا ۚ وَاللَّهُ يُحِبُّ المُطَّهِّرينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

ये लोग यक़ीनन झूठे है (ऐ रसूल) तुम इस (मस्जिद) में कभी खड़े भी न होना वह मस्जिद जिसकी बुनियाद अव्वल रोज़ से परहेज़गारी पर रखी गई है वह ज़रूर उसकी ज्यादा हक़दार है कि तुम उसमें खडे होकर (नमाज़ पढ़ो क्योंकि) उसमें वह लोग हैं जो पाक व पाकीज़ा रहने को पसन्द करते हैं और ख़ुदा भी पाक व पाकीज़ा रहने वालों को दोस्त रखता है