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109
أَفَمَن أَسَّسَ بُنيانَهُ عَلىٰ تَقوىٰ مِنَ اللَّهِ وَرِضوانٍ خَيرٌ أَم مَن أَسَّسَ بُنيانَهُ عَلىٰ شَفا جُرُفٍ هارٍ فَانهارَ بِهِ في نارِ جَهَنَّمَ ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर क्या वह अच्छा है जिसने अपने भवन की आधारशिला अल्लाह के भय और उसकी ख़ुशी पर रखी है या वह, जिसने अपने भवन की आधारशिला किसी खाई के खोखले कगार पर रखी, जो गिरने को है। फिर वह उसे लेकर जहन्नम की आग में जा गिरा? अल्लाह तो अत्याचारी लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता