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31
قُل مَن يَرزُقُكُم مِنَ السَّماءِ وَالأَرضِ أَمَّن يَملِكُ السَّمعَ وَالأَبصارَ وَمَن يُخرِجُ الحَيَّ مِنَ المَيِّتِ وَيُخرِجُ المَيِّتَ مِنَ الحَيِّ وَمَن يُدَبِّرُ الأَمرَ ۚ فَسَيَقولونَ اللَّهُ ۚ فَقُل أَفَلا تَتَّقونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

कहो, "तुम्हें आकाश और धरती से रोज़ी कौन देता है, या ये कान और आँखें किसके अधिकार में है और कौन जीवन्त को निर्जीव से निकालता है और निर्जीव को जीवन्त से निकालता है और कौन यह सारा इन्तिज़ाम चला रहा है?" इसपर वे बोल पड़ेगे, "अल्लाह!" तो कहो, "फिर आख़िर तुम क्यों नहीं डर रखते?"