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43
قالَ سَآوي إِلىٰ جَبَلٍ يَعصِمُني مِنَ الماءِ ۚ قالَ لا عاصِمَ اليَومَ مِن أَمرِ اللَّهِ إِلّا مَن رَحِمَ ۚ وَحالَ بَينَهُمَا المَوجُ فَكانَ مِنَ المُغرَقينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(मुझे माफ कीजिए) मै तो अभी किसी पहाड़ का सहारा पकड़ता हूँ जो मुझे पानी (में डूबने) से बचा लेगा नूह ने (उससे) कहा (अरे कम्बख्त) आज ख़ुदा के अज़ाब से कोई बचाने वाला नहीं मगर ख़ुदा ही जिस पर रहम फरमाएगा और (ये बात हो रही थी कि) यकायक दोनो बाप बेटे के दरमियान एक मौज हाएल हो गई और वह डूब कर रह गया