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44
وَقيلَ يا أَرضُ ابلَعي ماءَكِ وَيا سَماءُ أَقلِعي وَغيضَ الماءُ وَقُضِيَ الأَمرُ وَاستَوَت عَلَى الجودِيِّ ۖ وَقيلَ بُعدًا لِلقَومِ الظّالِمينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और (ग़ैब ख़ुदा की तरफ से) हुक्म दिया गया कि ऐ ज़मीन अपना पानी जज्ब (शोख) करे और ऐ आसमान (बरसने से) थम जा और पानी घट गया और (लोगों का) काम तमाम कर दिया गया और कश्ती जो वही (पहाड़) पर जा ठहरी और (चारो तरफ) पुकार दिया गया कि ज़ालिम लोगों को (ख़ुदा की रहमत से) दूरी हो