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29
لَيسَ عَلَيكُم جُناحٌ أَن تَدخُلوا بُيوتًا غَيرَ مَسكونَةٍ فيها مَتاعٌ لَكُم ۚ وَاللَّهُ يَعلَمُ ما تُبدونَ وَما تَكتُمونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

इसमें अलबत्ता तुम पर इल्ज़ाम नहीं कि ग़ैर आबाद मकानात में जिसमें तुम्हारा कोई असबाब हो (बे इजाज़त) चले जाओ और जो कुछ खुल्लम खुल्ला करते हो और जो कुछ छिपाकर करते हो खुदा (सब कुछ) जानता है