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37
وَما أَموالُكُم وَلا أَولادُكُم بِالَّتي تُقَرِّبُكُم عِندَنا زُلفىٰ إِلّا مَن آمَنَ وَعَمِلَ صالِحًا فَأُولٰئِكَ لَهُم جَزاءُ الضِّعفِ بِما عَمِلوا وَهُم فِي الغُرُفاتِ آمِنونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और (याद रखो) तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद की ये हस्ती नहीं कि तुम को हमारी बारगाह में मुक़र्रिब बना दें मगर (हाँ) जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए उन लोगों के लिए तो उनकी कारगुज़ारियों की दोहरी जज़ा है और वह लोग (बेहश्त के) झरोखों में इत्मेनान से रहेंगे